Chhannu Lal Mishra : पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन,पीएम मोदी ने जताई संवेदना

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Chhannu Lal Mishra

Chhannu Lal Mishra : शास्त्रीय गायक और पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन हो गया है। उनका निधन आज सुबह 5 बजे मिर्जापुर आवास में हुआ। पंडित छन्नूलाल मिश्र (89) को बीते शनिवार को दिल का दौरा पड़ गया था। परिवार के सदस्यों ने उन्हे मिर्जापुर के ओझला स्थित रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम हॉस्पिटल में भर्ती करवाया था।

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छन्नू लाल मिश्र लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनकी पीठ में बेड सोर होने के साथ ही शरीर में खून की कमी हो गई थी। उनकी पुत्री और केबी कॉलेज की प्रो. नम्रता मिश्रा ने बताया था कि बाबूजी को दिल का दौरा पड़ने के बाद डॉक्टरों ने जांच की। यहां दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया। आज सुबह उनकी बेटी नम्रता ने बताया कि पिता का निधन हो गया है।

नम्रता मिश्रा ने कहा, ‘आज सुबह सवा 4 बजे हमारे निवास स्थान गंगा दर्शन कॉलोनी, मिर्जापुर में उन्होंने अंतिम सांसें ली हैं और वह बीमार काफी समय से चल रहे थे। उनका अंतिम संस्कार शाम को मणिकर्णिका घाट पर होगा।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में भी अपना अमूल्य योगदान दिया। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सदैव उनका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त होता रहा। साल 2014 में वे वाराणसी सीट से मेरे प्रस्तावक भी रहे थे। शोक की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं। ओम शांति!’

पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार को सुबह 4:15 पर उनकी पुत्री नम्रता मिश्रा के गंगादर्शन कॉलोनी स्थित निवास पर निधन हो गया। पंडित छन्नुलाल मिश्रा का जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के हरिहरपुर गाँव में हुआ था।उन्होंने अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर बनारस में संगीत की विधिवत शिक्षा ली।

वहां उन्होंने किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खां से संगीत की गहन शिक्षा प्राप्त की। मिश्राजी बनारस घराने की गायकी, विशेषकर ख्याल और पूरब अंग की ठुमरी के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी प्रस्तुतियां भावपूर्ण और मधुरता से परिपूर्ण होती थीं, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हुई। वे पूरब अंग की ठुमरी के प्रमुख प्रतिपादक माने जाते हैं और उनके अनेक संगीत एल्बम जारी हुए हैं।

पंडित छन्नुलाल मिश्र को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नौशाद पुरस्कार और यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया। वे संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप से भी अलंकृत किए गए थे।

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